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UP TET Social Studies (सामाजिक अध्ययन) 100+ Important MCQs in Hindi

UP TET सामाजिक अध्ययन (Social Studies) परीक्षा की तैयारी के लिए यहाँ 100+ महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) दिए गए हैं। यह Quiz आपको History, भूगोल, राजनीति विज्ञान और पर्यावरण के प्रमुख विषयों का अभ्यास करने में मदद करेगा। UP GK Quiz – 50 Questions per Page ✅ Correct: 0    |    ❌ Wrong: 0 अगले 50 सवाल लोड करें

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उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य| परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण

उत्तर प्रदेश भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। उत्तर प्रदेश अपने ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहरों के लिए अटल प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख पर्यटन स्थल भी स्थित है जिसे भारत का इतिहास धर्म व संस्कृति जुड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में, यहां के वन्य जीव अभ्यारण व उद्यान काफी प्रसिद्ध है। वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान व वन्य जीव अभ्यारण स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में बढ़ते हुए शहरीकरण व पेड़ व जंगल काटने की वजह से कई जंगली जानवर लुप्त हो चुके हैं उन्हीं के संरक्षण के लिए यह प्रसिद्ध अभ्यारण बनाए गए हैं। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश के कुछ राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभ्यारण के बारे में पड़ेंगे जो की प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। व UP Constable आदि परीक्षा में पूछे जाते हैं। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश में केवल एक ही प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। जो की काफी प्राचीन समय से निर्मित है।निम्नलिखित उत्तर प्रदेश का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। संरक्षित क्षेत्र स्थान प्रमुख वन्यजीव दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लखीमपुर खीरी बाघ, गैंडा, बारहसिंगा कतरनिया घाट वन्यजीव अभयारण्य बहराइच घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य चंबल नदी क्षेत्र घड़ियाल, डॉल्फिन हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य मेरठ क्षेत्र नीलगाय, सांभर रणीपुर वन्यजीव अभयारण्य चित्रकूट तेंदुआ, चीतल कैमूर वन्यजीव अभयारण्य सोनभद्र-मिर्जापुर भालू, चिंकारा 1. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश का एकमात्र और सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान दुधवा राष्ट्रीय उद्यान है। इस उद्यान की स्थापना सन 1977 में की गई थी। यह लखीमपुरी के जिले नेपाल के पास में स्थित है। यह लगभग 490 किलोमीटर क्षेत्र की लंबाई में फैला हुआ है। यह उद्यान अपनी जैव विविधता के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। यहां पर पाए जाने वाले प्रमुख वन्य जीव बंगाल टाइगर, एक सिंह वाला गंदा, एशियाई हाथी, बारासिंघा, हिरण, तेंदुआ, जंगली सूअर और मगरमच्छ आदि पाए जाते है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान बारहसिंगा संरक्षण के लिए काफी प्रसिद्ध है। वन्य जीव के अलावा यहां पर स्थानीय व प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। यह उद्यान प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अच्छा प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यह उद्यान नेपाल भारत की तराई सीमा क्षेत्र पर स्थित है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट टाइगर भी चलाया जाता है। यहां पर केवल भारत के लोग ही नहीं व विदेश से आए लोग भी पर्यटन करना पसंद करते हैं। जीव प्रेमियों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। इसके आसपास घास के मैदान पाए जाते हैं। यहां दुर्लभ प्रजातियों के साथ- साथ संकटग्रस्त प्रजातियां भी जानवरों की पाई जाती है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूमना पर्यटकों के लिए काफी रोमांचित होता है। बिंदु जानकारी नाम दुधवा राष्ट्रीय उद्यान प्रकार राष्ट्रीय उद्यान स्थापना वर्ष 1977 स्थान लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश क्षेत्र तराई क्षेत्र प्रसिद्धि उत्तर प्रदेश का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख वन्यजीव बाघ, एक सींग वाला गैंडा, बारहसिंगा, हाथी प्रमुख वनस्पति साल के घने वन एवं घासभूमि महत्व प्रोजेक्ट टाइगर एवं गैंडा संरक्षण के लिए प्रसिद्ध 1. कतरनिया वन्य जीव अभ्यारण कतरनिया वन्य जीव अभ्यारण उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है। यह नेपाल की सीमा से जुड़ा हुआ है। यह वन्य जीव अभ्यारण जैव विविधता का मुख्य केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना लगभग 1975 में हुई थी। यह लगभग 550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर बाघ तेंदुआ हाथी चीतल एक सिंह वाला गेंडा फिशिंग कैट और ऊदबिलाव आदि जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण के पास ही गेरुआ नदी है जो की काफी प्रसिद्ध नदी है। इस नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ पाए जाते हैं। यह अभ्यारण 2003 में टाइगर प्रोजेक्ट में भी शामिल था। यहां पर पर्यटक जंगल सफारी व वोटिंग करना ज्यादा पसंद करते हैं। यहां पर मुख्य वन्य जीव जिनकी प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं उनका संरक्षण किया जाता है। यहां पर पक्षियों में गिद्ध, नीलकंठ प्रमुख है। हाल ही में इसको टूरिज्म के लिए विकसित किया गया है। यह भारतीय वन्य जीव संस्थान सहित कई संस्थाओं का अनुसंधान का केंद्र रहा है। यहां पर वन्य जीवों की निगरानी की जाती है। वन्य जीवों की निगरानी के लिए निगरानी नेटवर्क भी जारी किया गया है। 2. राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण उत्तर भारत में चंबल नदी के किनारे पर स्थित है। यह वन्य जीव अभ्यारण उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की सीमाओं तक फैला हुआ है। की स्थापना लगभग 1979 में हुई थी। यहां पर मुख्य प्रजातियां डॉल्फिन, घड़ियाल आदि पाए जाते हैं। यह अभ्यारण वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत संरक्षित है। यह चंबल नदी के 425 किलोमीटर लंबी धारा के साथ जुड़ा हुआ है। चंबल नदी भारत की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक मानी जाती है इसलिए इन जीवों के लिए राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण आदर्श है। इस अभ्यारण में न केवल जलचर को बल्कि कई वन्य जीवों को भी संरक्षण प्रदान है। यहां पर पक्षियों की भी 320 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यह वन्य जीव अभ्यारण बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 3. हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर के आसपास फैला हुआ है। यह एक सबसे बड़ा वन्य जीव अभ्यारण है। इस अभ्यारण की स्थापना लगभग 1986 में हुई थी। यह लगभग 2073 किलोमीटर वर्ग के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्रमुख नदी गंगा पर स्थित है। यहां के प्रसिद्ध जीव हिरण, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली सूअर, घड़ियाल आदि है। यहां पर कई प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि हस्तिनापुर को महाभारत काल से जोड़ा गया है। हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण को दलदली हिरण का संरक्षण क्षेत्र माना जाता है। यहां पर रेत के टिलो घास के मैदाने का मिश्रण पाया जाता है। इसमें लगभग 350 पक्षी भी पाए जाते हैं। यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाने में अत्यंत महत्वपूर्णता रखता है। प्रवासी पक्षियों का यहां पर प्रवेश इसको अत्यंत लोकप्रियता प्रदान करता है। यहां सरकार द्वारा कई जीवन के संरक्षण के लिए भी योजनाएं चलाई गई हैं। जिनमें से एक योजना राष्ट्रीय हरित अधिकरण है जिसे 2024 में यहां पर चलाया

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UP Lekhpal GK Question Bank 2026 + PDF Download

उत्तर प्रदेश लेखपाल एग्जाम के लिए आपको इस पेज पर इसे जनरल नॉलेज के सवाल मिलने वाले है जो की आपकी तयारी को और मजबूत कर देंगे | सबसे पहेले हम जानते है UP Lekhpal 2026 के Syllabus के बारे में, भाग विषय प्रश्न / अंक भाग-1 सामान्य ज्ञान (इतिहास, भूगोल, संविधान, अर्थशास्त्र) 20 भाग-1 ग्राम्य समाज, समसामयिकी, विज्ञान 15 भाग-1 पर्यावरण, DI और हिन्दी 30 भाग-2 कंप्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी 15 भाग-3 उत्तर प्रदेश विशेष (UP Special GK) 20 ⚠️ नेगेटिव मार्किंग: 1/4 (25%) | कुल समय: 120 मिनट इस वेबसाइट पर इन सभी विषयों से जुड़े हुए 10,000 से ज्यादा प्रश्न आपको पढने के लिए मिल जायेंगे, पर हम आपकी तयारी अच्छे से यही करवा देंगे भारत का इतिहास और भूगोल, और अर्थशास्त्र से जुड़े हुए सवाल आपको नीचे दिए गये बटन पर मिल जायेंगे इतिहास (History) भूगोल (Geography) अर्थशास्त्र (Economics) यहाँ पर उत्तर प्रदेश लेखपाल एग्जाम के लिए मिक्स सभी विषयों के 1000 सवाल दे रहे है | ये आपकी एग्जाम में बहुत मदद करेंगे GK Quiz ✅ Correct: 0    |    ❌ Wrong: 0 Load More Questions ऑनलाइन एग्जाम देने से पहले यह सुनिश्चित करें कि आपके कंप्यूटर के सभी hardware सही से काम कर रहे हों। keyboard की keys stuck हैं या ghosting हो रही है, यह check करने के लिए test-keyboard.online जैसे free online tools का उपयोग करें।

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उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के नाम और उनकी पूरी जानकारी

मुख्य विवरण जानकारी कुल जिलों की संख्या 75 कुल मंडलों की संख्या 18 राजधानी लखनऊ सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल) लखीमपुर खीरी सबसे छोटा जिला (क्षेत्रफल) हापुड़ सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला प्रयागराज सबसे साक्षर जिला गौतम बुद्ध नगर श्रेणी जिले का नाम विशेषता क्षेत्रफल में सबसे बड़ा लखीमपुर खीरी 7,680 वर्ग किमी क्षेत्रफल में सबसे छोटा हापुड़ 660 वर्ग किमी सर्वाधिक जनसंख्या प्रयागराज सबसे ज्यादा आबादी वाला जिला न्यूनतम जनसंख्या महोबा सबसे कम आबादी वाला जिला सबसे अधिक साक्षरता गौतम बुद्ध नगर सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे लोग सबसे कम साक्षरता श्रावस्ती सबसे कम साक्षरता दर वर्तमान नाम पुराना/अन्य नाम प्रयागराज इलाहाबाद अयोध्या फैजाबाद वाराणसी बनारस / काशी गोरखपुर गोरखपुरम कन्नौज कान्यकुब्ज (इत्र नगरी) कुशीनगर कसिया जिला प्रसिद्ध उद्योग अलीगढ़ ताले और हार्डवेयर भदोही कालीन (Carpet) कन्नौज इत्र (Perfume) मुरादाबाद पीतल के बर्तन मेरठ खेल का सामान आगरा चमड़ा उत्पाद और पेठा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल कितने जिले हैं? उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कुल 75 जिले हैं, जो 18 प्रशासनिक मंडलों में विभाजित हैं। उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा जिला कौन सा है? लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़ा जिला है। इसका कुल क्षेत्रफल 7,680 वर्ग किलोमीटर है। यूपी का सबसे नया जिला (75वां जिला) कौन सा है? यूपी के नवीनतम जिलों में शामली, हापुड़ और संभल शामिल हैं। प्रशासनिक सुधारों के तहत नए जिलों का गठन समय-समय पर होता रहा है, वर्तमान में 75 जिले क्रियाशील हैं। उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा जिला क्षेत्रफल में कौन सा है? हापुड़ जिला उत्तर प्रदेश का क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे छोटा जिला है (लगभग 660 वर्ग किमी)। यूपी का कौन सा जिला सर्वाधिक जनसंख्या वाला है? प्रयागराज (इलाहाबाद) उत्तर प्रदेश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला जिला है।

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उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल: इतिहास, संस्कृति और रोचक तथ्य | UP Tourism 2026

उत्तर प्रदेश भारत का एक समृद्ध एवं प्रमुख राज्य है। उत्तर प्रदेश से भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं भौगोलिक वस्तुएं जुड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश को भारत का हृदय माना जाता है। उत्तर प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक ,ऐतिहासिक पर्यटन स्थल देखने को मिलते हैं। यहां अध्यात्म शांति देखने को मिलती है। उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थल अपनी अलग कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक पर्यटन स्थल भारत में अत्यंत प्रसिद्ध है। UP के प्रमुख पर्यटन स्थल उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। Up कांस्टेबल परीक्षा Up tet परीक्षा आदि कई अन्य परीक्षाओं में भी उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं। निम्नलिखित उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल है जो आपको बताए गए हैं। 1. ताजमहल स्थान: आगरा ताजमहल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ था एवं 1653 में समाप्त हुआ था। ताजमहल सफेद संगमरमर का बना हुआ है जो की मकराना से लाया गया था।ताजमहल का गुंबद बड़ा ही शानदार है वह इसके आसपास की चार मीनारें इसकी शोभा में चार चांद लगा देती है।ताज महल सफेद संगमरमर के पत्थरों से बना हुआ है।यह उत्तर प्रदेश के इतिहास से जुड़ा हुआ है। ताजमहल प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इतिहास का मानना है कि मुगल शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज के लिए प्रेम याद में निर्मित कराया था। ताज महल अपनी सुंदर नक्काशी एवं वास्तु कला के लिए अत्यंत प्रसिद्ध है। ताजमहल केवल भारत प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि विश्व प्रसिद्ध है। ताजमहल उत्तर प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है। देश विदेश से लाखों पर्यटक ताजमहल का सुंदर एवं मनमोहक दृश्य देखने आते हैं। ताजमहल आगरा के बीचो-बीच बना हुआ है।ताजमहल के पीछे से यमुना नदी बहती हुई दिखाई देती है। सूर्य अस्त होते ही ताजमहल का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है। ताजमहल को बनने में लगभग 22 साल का समय लगा था। माना जाता है कि ताजमहल में मुमताज एवं शाहजहां को दफनाया गया था। ताजमहल का निर्माण काफी कीमती पत्थरों से किया गया था। ताजमहल के सामने एक मनमोहक गार्डन बना हुआ है जिसका नाम चारबाग है। Important point: ताजमहल सात अजूबों में से एक अजूबा है। FAQ महत्वपूर्ण ताजमहल किसकी याद में बनवाया गया था? मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था। ताजमहल को बनने में कितना समय लगा? इसका निर्माण 1632 में शुरू हुआ और इसे पूरा होने में लगभग 22 साल लगे। ताजमहल का वास्तुकार (Architect) कौन था? इसके मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे। ताजमहल किस पत्थर से बना है? यह राजस्थान के मकराना से लाए गए सफेद संगमरमर से बना है। ताजमहल की ऊँचाई कितनी है? ताजमहल की कुल ऊँचाई 73 मीटर है। 2. फतेहपुर सीकरी स्थान: आगरा के पास फतेहपुर सीकरी का निर्माण 1571 में किया गया था। फतेहपुर शब्द का मतलब विजय का शहर है एवं सीकरी उसके पुराने गांव का नाम था। यह जगह काफी शांत एवं रहस्यमय मानी जाती है। फतेहपुर सीकरी लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा 54 मीटर ऊंचा है। इतिहास का मानना है की बुलंद दरवाजा पर कुरान की आयतें लिखी है। इतिहास का मानना है कि दीवान-ए-खास में बैठकर अकबर अपनी महत्वपूर्ण संगोष्ठी किया करते थे।‍ यह स्थान विभिन्न धर्मो की एकता को प्रदर्शित करता है। यहां का जामा मस्जिद बुलंद दरवाजा व दीवान-ए-खास पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। फतेहपुर सिकरी घूमने कई पर्यटक काफी दूर-दूर से यहां पर आते हैं। फतेहपुर सीकरी में हिंदू एवं मुस्लिम वास्तुकला का मिश्रण है। फतेहपुर सिकरी यूनेस्को के विश्व धरोहर सूची में शामिल भी है। इतिहास का मानना है कि फतेहपुर सिकरी मुगल अकबर ने बसाया था। Important point: फतेहपुर सीकरी को अकबर ने अपनी राजनीतिक और धार्मिक विचारधारा को लागू करने के लिए बनाया था। 3. अयोध्या-राम जन्मभूमि राम मंदिर का उद्घाटन 22 जनवरी 2024 को किया गया था। राम मंदिर में भगवान के बाल रूप की मूर्ति स्थापित की गई है। राम मंदिर गुलाबी पत्थरों से निर्मित है। यह मंदिर भारत के ऐतिहासिक एवं धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। अयोध्या राम जन्म भूमि को उत्तर प्रदेश के धार्मिक प्रमुख स्थलों में से एक माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्री राम जी का जन्म अयोध्या में हुआ था। अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित एक काफी पुराना शहर है जो अपनी धार्मिकता के लिए प्रसिद्ध है। अयोध्या राम जन्म भूमि प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाती है।यहां पर श्री राम जी का भाव राम मंदिर का निर्माण किया गया है। हर साल यहां रामनवमी पर लाखों लोगों द्वारा दीपदान भी किया जाता है। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु राम जन्मभूमि में श्री राम के भव्य मंदिर के दर्शन करने आते हैं। राम मंदिर का निर्माण होने के पश्चात लाखों पर्यटकों को यहां दर्शन करने के लिए आता हुआ देखा जाता है। राम मंदिर उत्तर प्रदेश की धार्मिक सुंदरता को दर्शाता है। अयोध्या सरयू नदी के किनारे बसा एक शहर है। ‍ अयोध्या शहर का उल्लेख हिंदुओं के प्रमुख प्राचीन ग्रंथो जैसे रामायण में है। यहां पर बहती सरयू नदी एक पवित्र नदी मानी जाती है।लोग दूर-दूर से अयोध्या में सरयू नदी में स्नान करने आते हैं। Important point: अयोध्या बहुत प्राचीन एवं लाखों साल पुराना शहर माना जाता है। 4. मथुरा-वृंदावन मथुरा और वृंदावन भारत के सभी पवित्र स्थान में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मथुरा वृंदावन श्री कृष्ण की जन्म भूमि है। यह यमुना नदी के किनारे स्थित है। मथुरा और वृंदावन को मिलाकर ब्रजभूमि कहा जाता है। मथुरा वृंदावन में अनेकों पर्यटन स्थल है जैसे श्री कृष्ण जन्मभूमि, राधा रमन मंदिर, कोकिला वन, प्रेम मंदिर व इस्कॉन टेंपल आदि। मथुरा वृंदावन में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।केवल भारत के ही नहीं आसपास के देशों से भी काफी लोग आते हैं। ब्रज में लगभग 84 कोर् की परिक्रमा है जिसको पूरी करने अनेकों भक्त आते हैं। यहां पर होली का त्योहार सबसे प्रमुख माना जाता है।वृंदावन की होली केवल भारत में ही नहीं बल्कि देश विदेश में भी अत्यंत प्रसिद्ध मानी जाती है।बाहर के देशों के लोग भी वृंदावन की होली खेलने आते हैं। मथुरा वृंदावन श्री कृष्ण की लीलाओं

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भारत की 7 बहन नदियाँ (Seven Sister Rivers)

परिचय भारत एक प्राकृतिक देश है। भारत केवल अपने पेड़ पौधों की प्रकृति से नहीं जाना जाता बल्कि यहां प्रकृति से जुड़े अनेकों आयाम है, जैसे नदियां, झरने, उद्यान व अभ्यारण। भारत में कई नदियां पाई जाती हैं। भारत की नदियां केवल जल का स्रोत ही नहीं बल्कि भारत की प्रकृति संस्कृति एवं इतिहास का आधार भी है। 7 बहन नदियां परिचय भारत नदियों का देश भी माना जाता है। सबसे प्रमुख नदियां यहां पर सात बहन नदियां मानी जाती है। सात बहन नदिया इस शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उत्तर पूर्व भारत की नदियां जो एक दूसरे से जुड़ी है उनके समूह के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य ज्ञान एवं परीक्षा की दृष्टि से सात बहन नदियां एक महत्वपूर्ण प्रकरण माने जाते हैं इसलिए हम इन सात बहनों का अध्ययन करेंगे। 1. ब्रह्मपुत्र नदी ब्रह्मपुत्र नदी भारत की सबसे चौड़ी नदी मानी जाती है। इसकी कुल लंबाई 2900 किलोमीटर है। यह तीन देशों से होकर निकलती है। इस नदी का इतिहास भारत में सबसे खास है। ब्रह्मपुत्र नदी भारत की संस्कृति से जुड़ी हुई है। अंत में ब्रह्मपुत्र नदी बंगाल की खाड़ी में जाकर मिल जाती है। यह नदी तिब्बत, भारत, बांग्लादेश से होकर निकलती है। यह उत्तर पूर्वी क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाती है। Note: ब्रह्मपुत्र नदी भारत की सबसे विशाल नदियों में से एक है। 2. बराक नदी बराक नदी मणिपुर से होकर निकलती है। इस नदी की कुल लंबाई लगभग 900 किलोमीटर है। यह नदी तीन चरणों में होकर निकलती है। पहले चरण में मणिपुर दूसरे चरण में असम व अंत में बांग्लादेश से निकलती है। अंत में यह नदी मेघना नदी में सम्मिलित हो जाती है। भारत में इस नदी का सांस्कृतिक महत्व है। Note: बराक नदी का उत्तर पूर्वी भारत में बेहद महत्व है व यह उत्तर पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण नदी मानी जाती है। 3. सुबनसिरी नदी सुबनसिरी नदी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों में से एक नदी मानी जाती है। यह नदी तिब्बत से होकर निकलती है। नदी की लंबाई 400 से 450 किलोमीटर है। इस नदी का जल काफी स्वच्छ और ठंडा होता है। यह नदी तीन मार्गो से होकर निकलती है।पहले अरुणाचल प्रदेश से निकलकर असम में प्रवेश करती है अंत में यह ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर मिल जाती है। Note: इस नदी के नाम का अर्थ सोने जैसी नदी है। इसे पवित्र नदियों में से एक माना जाता है। 4. लोहित नदी लोहित नदी भारत में अपने प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यह नदी तिब्बत से होकर निकलती है। इस नदी की लंबाई लगभग 200 किलोमीटर है। यह तीन जगह से बहती हुई निकलती है।पहले अरुणाचल प्रदेश से दूसरा असम से एवं अंत में ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर मिल जाती है। इस नदी का ब्रह्मपुत्र के साथ संगम बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। Note: भारत की कई परंपराएं एवं लोक कथाएं लोहित नदी से जुड़ी हुई है। 5. दिबांग नदी दिबांग नदी उत्तर पूर्वी क्षेत्र की सबसे शक्तिशाली नदी मानी जाती है। इस नदी की कुल लंबाई 300 किलोमीटर है। यह नदी भी तीन मार्गो से होकर निकलती है। पहले अरुणाचल प्रदेश दूसरा असम एवं अंत में ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर सम्मिलित हो जाती है। यह ऊंचे पर्वत व घाटियों से निकलकर भारत में प्रवेश करती है। Note: यह नदी स्थानीय जनजातीय के लिए सबसे महत्वपूर्ण एवं अहम नदी है। 6. कामेंग नदी कामेंग नदी हिमालय क्षेत्र की नदी मानी जाती है। यह तीन रास्तों से निकलती है प्रथम तिब्बत से निकलती है व अरुणाचल प्रदेश से निकलकर असम तक पहुंचती है व अंत में ब्रह्मपुत्र नदी में लीन हो जाती है। यह नदी सबसे सुंदर नदी मानी जाती है। इस नदी की लंबाई लगभग 264 किलोमीटर है। Note: यह नदी तेज एवं उग्र धारा के साथ बहती है। यह नदी जैव विविधता के लिए भी जानी जाती है। 7. मानस नदी मानस नदी भूटान के पहाड़ी क्षेत्रों में से होकर निकलती है।  प्रथम यह भूटान से निकलती है व असम में प्रवेश करती है और अंत में चलकर ब्रह्मपुत्र नदी में मिल जाती है। यह सबसे स्वच्छ नदी है। मानस नदी की लंबाई लगभग 400 किलोमीटर है। इस नदी की साफ और शांत जलधारा है। Note: मानस नदी अपनी जैव विविधता और स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है।

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चंबल नदी पर बने बांध: प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

परिचय चंबल नदी एक महत्वपूर्ण नदी है। चंबल नदी राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से होकर निकलती है। चंबल नदी राजस्थान के कोटा की प्रमुख नदी मानी जाती है। राजस्थान में अनेकों उघान & बांध बनाए गए हैं लेकिन चंबल नदी पर बने हुए बांध राजस्थान के महत्वपूर्ण बांधों में से एक है। चंबल नदी से निकलने वाला जल साफ एवं स्वच्छ होता है। भारत सरकार द्वारा चंबल वैली परियोजना शुरू की गई थी जिसके अंतर्गत कई बांधों का निर्माण किया गया था। चंबल नदी पर बने महत्वपूर्ण बांधों की सूची चंबल नदी पर बने बांध 📊 चंबल नदी के बांधों का तुलनात्मक विवरण बांध का नाम स्थान (ज़िला व राज्य) निर्माण चरण निर्माण वर्ष मुख्य उद्देश्य / विशेषता 1. गांधी सागर बांध मंदसौर, मध्य प्रदेश प्रथम चरण 1960 चंबल परियोजना का सबसे बड़ा और एकमात्र बांध जो MP में है। 2. राणा प्रताप सागर बांध रावतभाटा, चित्तौड़गढ़ (राज.) द्वितीय चरण 1970 भराव क्षमता की दृष्टि से राजस्थान का सबसे बड़ा बांध। 3. जवाहर सागर बांध बोराबास, कोटा-बूंदी (राज.) तृतीय चरण 1972 यह एक पिकअप बांध (Pick-up Dam) है। 4. कोटा बैराज कोटा शहर, राजस्थान प्रथम चरण 1960 इससे बिजली नहीं बनती, इसका उपयोग केवल सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए होता है। भारत में कई सारे बांध बनाए गए हैं लेकिन राजस्थान की चंबल नदी पर स्थित बांध प्रतियोगिता परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं जिनकी सूची निम्न दी गई है। 1. गांधी सागर बांध गांधी सागर बांध मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में चंबल नदी पर स्थित है, जिसका निर्माण कार्य सन 1954 में प्रारंभ होकर 1960 में पूर्ण हुआ था। यह चंबल नदी घाटी परियोजना के अंतर्गत बना सबसे बड़ा बांध माना जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण करने के साथ-साथ बड़े स्तर पर जल विद्युत उत्पन्न करना है; इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 115 मेगावाट है। बिजली उत्पादन के अलावा यह बांध कृषि क्षेत्र के लिए एक वरदान साबित हुआ है क्योंकि इसके द्वारा बड़े पैमाने पर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है, जिससे क्षेत्र में कृषि और पैदावार को अभूतपूर्व बढ़ावा मिला है। 2. राणा प्रताप सागर बांध स्थान: राणा प्रताप सागर बांध चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में स्थित है। निर्माण: राणा प्रताप सागर बांध का निर्माण 1960 में शुरू हुआ व 1970 में पूरा हुआ। विशेषताएं • राजस्थान के महत्वपूर्ण बांधों में से एक राणा प्रताप सागर बांध माना जाता है। • इस बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य जल विद्युत उत्पादन है। • राणा प्रताप सागर बांध की जल संरक्षण क्षमता सबसे अधिक मानी जाती है। • राणा प्रताप सागर बांध राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक है। • यह बांध आसपास के क्षेत्र को जल उपलब्ध भी करता है। • राणा प्रताप सागर बांध गांधी सागर बांध के नीचे की ओर बना है। मुख्य बिंदु: राणा प्रताप सागर बांध की जल विद्युत उत्पन्न क्षमता 172 मेगावाट है। 3. जवाहर सागर बांध स्थान: जवाहर सागर बांध कोटा के पास स्थित है। निर्माण: इस बांध का निर्माण 1965 में शुरू हुआ व 1972 में पूरा हुआ। विशेषताएं • जवाहर सागर बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य जल विद्युत उत्पन्न करना है। • बिजली बनाने के लिए जवाहर सागर बांध का उपयोग किया जाता है। • जवाहर सागर बांध चाहे आकर में छोटा है लेकिन यह राजस्थान के महत्वपूर्ण बांध में से एक है। • इस बांध का निर्माण चंबल घाटी परियोजना के अंतर्गत किया गया था। • जल को संरक्षित कर विद्युत उत्पादन करना इस बांध का उद्देश्य है। मुख्य बिंदु: इस बांध की विद्युत उत्पादन क्षमता लगभग 99 मेगावाट है। 4. कोटा बैराज बांध स्थान: कोटा बैराज बांध राजस्थान के कोटा जिले में स्थित है। निर्माण: इस बांध का निर्माण 1953 में प्रारंभ हुआ व 1960 में पूरा हुआ। विशेषताएं • कोटा बैराज बांध का मुख्य उद्देश्य अन्य बांधों की तरह विद्युत उत्पादन नहीं बल्कि सिंचाई है। • कोटा बैराज को नहरों से जोड़कर इसका जल खेतों में पहुंचाया जाता है। • यह बैराज बांध कृषकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण बांध है। • कोटा बैराज बांध में कृषकों को खेती में बढ़ावा दिया है। • कोटा बैराज बांध राजस्थान के प्रमुख बांधों में से एक है। • इस बांध में अधिक से अधिक जल संरक्षित करके कृषियों को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाता है। मुख्य बिंदु: कोटा बैराज बांध का मुख्य उद्देश्य शुष्क क्षेत्र में कृषि संभव करना है। याद रखने की महत्वपूर्ण ट्रिक👇 परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण यहां आपको इन बांधो को याद रखने की एक छोटी सी ट्रिक दी गई है: G, R, J, K👇 G: Gandhi sagar dam ( गांधी सागर बांध) R: Rana pratap sagar dam ( राणा प्रताप सागर बांध) J: Jawahar sagar dam ( जवाहर सागर बांध) K: Kota barrage dam ( कोटा बैराज बांध) निष्कर्ष चंबल नदी पर स्थित यह सभी बांध आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए है। अधिकतर बांधो का मुख्य उद्देश्य जल विद्युत उत्पादन करना ही है व अन्य बांधों का उद्देश्य सिंचाई के लिए जल उपलब्ध कराना है। बांध चाहे छोटा हो या बड़े लेकिन जल संरक्षण, विद्युत उत्पादन, जल उपलब्ध करवाना, बाढ़ को रोकना, बारिश के अतिरिक्त पानी को रोकना आदि सभी में सहायक होते हैं।

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राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण्य: परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स

परिचय राजस्थान केवल मरुस्थलीय क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि अपने पर्यटन क्षेत्र के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। राजस्थान में वन्य जैव विविधता अधिक होने के कारण यहां के उद्यान काफी प्रसिद्ध है। पर्यटक भी इन उद्यानों को देखने व घूमना पसंद करते हैं। राजस्थान के यह उद्यान न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं बल्कि जैव प्रजातियों का संरक्षण भी करते हैं। राजस्थान में काफी सारे उद्यान है लेकिन परीक्षा की दृष्टि से हम कुछ महत्वपूर्ण उद्यानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जो की निम्नलिखित है: राजस्थान के प्रमुख उद्यान व अभ्यारण्य राजस्थान के प्रमुख उद्यान व अभ्यारण्य की सूची क्र.सं. उद्यान / अभ्यारण्य का नाम जिला / स्थान 1. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर 2. केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर 3. मुकुंदरा Hils राष्ट्रीय उद्यान कोटा, चित्तौड़गढ़ 4. राष्ट्रीय मरु उद्यान जैसलमेर, बाड़मेर 5. सरिस्का वन्यजीव अभ्यारण्य अलवर 6. सीतामाता वन्यजीव अभ्यारण्य प्रतापगढ़ 7. तालछापर अभ्यारण्य चूरू 8. माउंट आबू अभ्यारण्य सिरोही 9. कुंभलगढ़ अभ्यारण्य राजसमंद, उदयपुर, पाली 10. राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर 1. रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान केवल राजस्थान का ही नहीं बल्कि भारत का भी सबसे प्रसिद्ध उद्यान हैं। यह उद्यान अपने चीतों के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। विशेषताएं स्थान: सवाई माधोपुर स्थापना: 1980 में यहां पर पाए जाने वाले मुख्य वन्य जीव बाघ, तेंदुआ, भालू, चीता, हिरण, मगरमच्छ, लंगूर आदि हैं।  रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में सूखे‌ जंगल पाए जाते हैं। प्राचीन काल में जयपुर के महाराजाओं का शिकार का स्थान रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान हुआ करता था। 2. सरिस्का टाइगर रिज़र्व उद्यान सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान अरावली पर्वत श्रृंखला पर बना हुआ है। राजस्थान के प्रमुख उद्यानों में से एक सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान है। विशेषताएं स्थान: अलवर स्थापना: 1955 में सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में पाए जाने वाले प्रमुख वन्य जीव लंगूर, तेंदुआ, सांभर, चीता, बाघ, लकड़बग्घा, जंगली सूअर आदि है। यहां पर सूखे पेड़ पाती वन पाए जाते हैं वह अनेक प्रकार के पेड़ भी यहां पर पाए जाते हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में बेर के पेड़ भी पाए जाते हैं। 3. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर में स्थित हैं।केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को बर्ड सैंक्चुरी भरतपुर के नाम से भी जाना जाता है।यहां पर कई सारे पक्षी आवागमन करते हैं। यह मुख्यतः प्रवासी पक्षियों के आवागमन के लिए प्रसिद्ध है। विशेषताएं स्थान: भरतपुर स्थापना: 1982 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मुख्यतः हमिंगबर्ड, क्रेन, ईगल, सारस, बत्तख, साइबेरियन क्रेन आदि पक्षी पाए जाते हैं। यहां अन्य जल जीव जैसे कछुआ, मेंढक, सांप, मछली आदि भी पाए जाते हैं। यहां पर घास के मैदान झाड़ियां और पेड़ भी पाए जाते हैं। भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को घना पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है। 4. डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में फैला हुआ है। यह उद्यान अपने रेट के टिलों की वजह से काफी प्रसिद्ध माना जाता है। डेजर्ट का मतलब रेट होता है एवं इस उद्यान में भी रेत के‌ टिले पाए जाते हैं। स्थान: बाड़मेर और जैसलमेर स्थापना: 1980 डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक माना जाता है। यहां पर चिंकारा, डेजर्ट फॉक्स, ईगल, डेजर्ट कैट, मॉनिटर लिजर्ड आदि  रेगिस्तानी पक्षी व जानवर पाए जाते हैं। यहां पर चट्टानी क्षेत्र भी देखने को मिलता हैं।  यहां पर अत्यधिक रेट होने के कारण यहां पर कैक्टस के पौधे भी पाए जाते हैं। 5. माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण सिरोही जिले में स्थित है। माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है। यहां पर सदाबहार वन पाए जाते हैं जिनकी वजह से यह काफी प्रसिद्ध वन्य जीव अभ्यारण है। विशेषताएं स्थान: माउंट आबू सिरोही स्थापना: 1960 माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सांभर, स्लॉथ भालू, भेड़िया, जंगली सूअर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। यह वन्य जीव अभ्यारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता जैसे सुंदर घाटियाँ‌ झरने व नदी के लिए प्रसिद्ध है। यह अभ्यारण भारत के ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। 6. कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण उदयपुर में स्थित है। यह अभ्यारण कुंभलगढ़ किले के आसपास फैला हुआ है। यह अभ्यारण घने जंगल और पहाड़ी इलाकों में बना हुआ है। यह अपने प्राकृतिक स्वरूप के लिए काफी प्रसिद्ध है। स्थान: राजसमंद, उदयपुर, पाली स्थापना: 1971 कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में भालू, तेंदुआ, जंगली सूअर, नीलगाय आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण में ईगल, उल्लू, मोर आदि कई स्थानीय जीव पाए जाते हैं। यह अपने सूखे पत्तों वाले वन के लिए प्रसिद्ध है। कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में बड़ा आकर्षक दृश्य देखने को मिलता है। 7. ताल छापर अभ्यारण ताल छापर अभ्यारण चुरू जिले में स्थित है। ताल छापर अभ्यारण चाहे एक छोटा अभ्यारण है परंतु यह भी राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यारण है। ताल छापर अभ्यारण पक्षियों की प्रजाति के लिए काफी प्रसिद्ध है। स्थान: चुरु स्थापना: 1966 ताल छापर अभ्यारण में क्रेन व ईगल मुख्यतः पाए जाने वाले पक्षी हैं। यह अभ्यारण क्षेत्र चारों तरफ से घास से घिरा हुआ है। इस अभ्यारण में 300 से भी अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है। यहां के खुले मैदाने में काले हिरण देखने को मिल जाते हैं। 8. सीता माता वन्य जीव अभ्यारण सीता माता वन्य जीव अभ्यारण प्रतापगढ़ में स्थित है। यह अभ्यारण उड़ने वाली गिलहरियों के लिए प्रसिद्ध है। इस अभ्यारण के चारों ओर घने जंगल पाए जाते हैं। स्थान: प्रतापगढ़ स्थापना: 1979 इस अभ्यारण में उड़ने वाली गिलहरियां पाई जाती है। सीता माता वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सियार, चीता, जंगली बिल्ली, हिरण आदि जानवर पाए जाते हैं।धर्म की दृष्टि से यह अभ्यारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राजस्थान के सबसे बड़े अभ्यारण में से एक है। 9. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण यह अभ्यारण राजस्थान की सबसे प्रमुख नदी चंबल नदी के क्षेत्र में स्थित है। इस अभ्यारण को बनाने का मुख्य उद्देश्य जल जीव का संरक्षण करना है। यह अभ्यारण काफी लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है। स्थान: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य

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राजस्थान के 10 सबसे बड़े बाँध|(Biggest dams of Rajasthan)

परिचय राजस्थान भले ही एक मरुस्थलीय राज्य माना जाता है लेकिन सिंचाई के लिए जल संरक्षण के लिए यहां पर कई प्रकार के बांध बनाए गए हैं। यह बांध राजस्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Dams of Rajasthan ( राजस्थान के प्रमुख बांध ) राजस्थान में छोटे और बड़े सभी बांधों को मिलाया जाए तो  काफी सारे बांधों का निर्माण यहां पर किया गया है परंतु एग्जाम के द्रष्टि से हमें राजस्थान के प्रमुख बांधो के बारे में जानकारी करनी है जो कि कुछ निम्न इस प्रकार से है: 1. राणा प्रताप सागर बांध राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक राणा प्रताप सागर बांध को माना जाता है। राणा प्रताप सागर बांध की जल संरक्षण क्षमता अधिक होने के कारण इसको राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक माना जाता है। विशेषताएं स्थान: चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में नदी: चंबल नदी निर्माण: 1960-1970 उपयोग: • बिजली उत्पादन • सिंचाई • जल संरक्षण 2. जवाहर सागर बांध राजस्थान के कोटा जिले में बना हुआ ये बांध, राजस्थान का प्रमुख बांध है ये भी चम्बल नदी पर बना हुआ है और बिजली की उत्पादन में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है। 1960–1970 के दशक में इसका निर्माण किया गया है। विशेषताएं स्थान: कोटा नदी: चंबल नदी निर्माण कार्य: 1960 से 1970 मुख्य उपयोग: • जल विद्युत निर्माण करने के लिए। 3. कोटा बैराज कोटा बैराज सिंचाई के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बंद माना जाता है जो की राजस्थान के कोटा जिले में स्थित है। राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से कोटा बैराज एक बाँध होने के कारण यहां से लाखों हेक्टर पानी प्राप्त होता है। विशेषताएं स्थान: कोटा नदी: चंबल नदी निर्माण कार्य: 1954-1960 उपयोग: • खेतों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करवाना। • फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए। 4. माही बजाज सागर बांध माही बजाज सागर बांध दक्षिण राजस्थान का प्रमुख बांध माना जाता है। खेती में उपयोगी यह बंद कृषकों के लिए वरदान साबित होता है। मत्स्य पालन वालों के लिए माही बजाज सागर बांध एक अच्छा स्रोत है। विशेषताएं स्थान: बांसवाड़ा नदी: माही नदी निर्माण: 1972-1983 उपयोग: • माही बाजार सागर बांध का प्रमुख उपयोग सिंचाई है। • मत्स्य पालन वालों के लिए माही बाजार सागर बांध एक सहायक स्रोत है। • इस बांध का मुख्य प्रयोग जल विद्युत उत्पादन भी है। 5. बीसलपुर बाँध बीसलपुर बांध राजस्थान के बड़े बांधों में से एक माना जाता है। बड़े बालों में से एक होने के कारण यह कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता करवाता है। बीसलपुर बांध आसपास के क्षेत्र के लिए पानी की उपलब्धता का एक अच्छा स्रोत है। विशेषताएं स्थान: टोंक नदी: बनास नदी निर्माण: 1990-1999 उपयोग: • बीसलपुर बांध का मुख्य उपयोग सिंचाई है। • बीसलपुर बांध अपने आसपास के क्षेत्र जैसे जयपुर अजमेर आदि कई अन्य क्षेत्रों को भी जल उपलब्ध करवाता है। 6. जाखम बांध जाखम बांध राजस्थान के मुख्य परियोजनाओं के अंतर्गत आता है। आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए जाखम बांध का निर्माण किया गया था। इससे कई सुविधाओं में वृद्धि देखने को मिली है। विशेषताएं स्थान: प्रतापगढ़ नदी: जाखम नदी निर्माण: 1970-1986 उपयोग: • जाखम बांध का मुख्य उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जाता है। • इसका एक मुख्य उपयोग सिंचाई भी है। 7. सोम-कमला-अंबा बाँध सोम-कमला-अंबा-बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित है।यह बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित किसानों के लिए लाभकारी साबित हुआ है। यह दक्षिण राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण बांध माना जाता है। विशेषताएं स्थान: डूंगरपुर नदी: सोम नदी निर्माण: 1991-1999 उपयोग: • इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण है। • इसका अन्य मुख्य उद्देश्य सिंचाई भी है। 8. मेजा बांध मेजा बांध राजस्थान के प्रमुख जलाशय में से एक माना जाता है। मेजा बांध का स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह बांध कृषियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हुआ है। विशेषताएं स्थान: भीलवाड़ा नदी: मेजा नदी निर्माण: 1957 उपयोग: • मेजा बांध का प्रमुख उपयोग जलापूर्ति है। • इसका अन्य महत्वपूर्ण प्रयोग सिंचाई भी है। 9. पंचना ‌बांध पंचना बांध‌ पाॅच नदियों के संगम पर बना है इसलिए इसका नाम पंचना बांध पड़ा। पूर्वी राजस्थान के लिए यह एक महत्वपूर्ण बांध है। राजस्थान के प्रमुख बांधों में से एक बांध पांचना बांध माना जाता है। विशेषताएं स्थान: करौली नदी: पांच नदियों का संगम निर्माण: 1978-79 उपयोग: • इस बांध का मुख्य उपयोग बाढ़ नियंत्रण करना है। • इसका उपयोग जल संग्रहण के लिए भी किया जाता। • सिंचाई में भी यह बांध‌ उपयोगी है। 10. जवाई बांध जवाई बांध पश्चिम राजस्थान का प्रमुख बांध है। यह बांध वन्य जीव संरक्षण और पर्यटन के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।  जवाई बांध पश्चिम राजस्थान की एक पहचान है। जवाई बांध आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। विशेषताएं स्थान: पाली नदी: जवाई नदी निर्माण: 1946-1957 उपयोग: • इसका मुख्य उपयोग पेयजल के लिए किया जाता है। • इसका अन्य मुख्य उपयोग सिंचाई भी है। राजस्थान के प्रमुख बाँध: (FAQ) राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? भराव क्षमता (Water Storage) के आधार पर राणा प्रताप सागर बाँध (चित्तौड़गढ़) सबसे बड़ा बाँध है। राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? भराव क्षमता में दूसरा स्थान माही बजाज सागर बाँध (बाँसवाड़ा) का है। यह राजस्थान का सबसे लंबा बाँध भी है। पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध जवाई बाँध (पाली) है। इसे ‘मारवाड़ का अमृत सरोवर’ भी कहते हैं। राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध कौन सा है? प्रतापगढ़ जिले में स्थित जाखम बाँध राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध है (ऊँचाई: 81 मीटर)। राजस्थान का सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध कौन सा है? करौली जिले में स्थित पाँचना बाँध मिट्टी से बना राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। यह अमेरिका के सहयोग से बना था। राजस्थान का सबसे छोटा बाँध कौन सा है? क्षेत्रफल और भराव के हिसाब से धौलपुर का लोटी बाँध सबसे छोटा माना जाता है। बनास नदी पर बना सबसे प्रमुख बाँध कौन सा है? टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बाँध बनास नदी पर बना है, जो राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। कोटा बैराज का मुख्य उपयोग क्या है? चंबल नदी पर बने इस बाँध का उपयोग

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