परिचय
राजस्थान भले ही एक मरुस्थलीय राज्य माना जाता है लेकिन सिंचाई के लिए जल संरक्षण के लिए यहां पर कई प्रकार के बांध बनाए गए हैं। यह बांध राजस्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Dams of Rajasthan ( राजस्थान के प्रमुख बांध )
राजस्थान में छोटे और बड़े सभी बांधों को मिलाया जाए तो काफी सारे बांधों का निर्माण यहां पर किया गया है परंतु एग्जाम के द्रष्टि से हमें राजस्थान के प्रमुख बांधो के बारे में जानकारी करनी है जो कि कुछ निम्न इस प्रकार से है:
1. राणा प्रताप सागर बांध
राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक राणा प्रताप सागर बांध को माना जाता है। राणा प्रताप सागर बांध की जल संरक्षण क्षमता अधिक होने के कारण इसको राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक माना जाता है।
विशेषताएं
स्थान: चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में
नदी: चंबल नदी
निर्माण: 1960-1970
उपयोग:
• बिजली उत्पादन
• सिंचाई
• जल संरक्षण
2. जवाहर सागर बांध
राजस्थान के कोटा जिले में बना हुआ ये बांध, राजस्थान का प्रमुख बांध है ये भी चम्बल नदी पर बना हुआ है और बिजली की उत्पादन में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है। 1960–1970 के दशक में इसका निर्माण किया गया है।
विशेषताएं
स्थान: कोटा
नदी: चंबल नदी
निर्माण कार्य: 1960 से 1970
मुख्य उपयोग:
• जल विद्युत निर्माण करने के लिए।
3. कोटा बैराज
कोटा बैराज सिंचाई के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बंद माना जाता है जो की राजस्थान के कोटा जिले में स्थित है। राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से कोटा बैराज एक बाँध होने के कारण यहां से लाखों हेक्टर पानी प्राप्त होता है।
विशेषताएं
स्थान: कोटा
नदी: चंबल नदी
निर्माण कार्य: 1954-1960
उपयोग:
• खेतों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करवाना।
• फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए।
4. माही बजाज सागर बांध
माही बजाज सागर बांध दक्षिण राजस्थान का प्रमुख बांध माना जाता है। खेती में उपयोगी यह बंद कृषकों के लिए वरदान साबित होता है। मत्स्य पालन वालों के लिए माही बजाज सागर बांध एक अच्छा स्रोत है।
विशेषताएं
स्थान: बांसवाड़ा
नदी: माही नदी
निर्माण: 1972-1983
उपयोग:
• माही बाजार सागर बांध का प्रमुख उपयोग सिंचाई है।
• मत्स्य पालन वालों के लिए माही बाजार सागर बांध एक सहायक स्रोत है।
• इस बांध का मुख्य प्रयोग जल विद्युत उत्पादन भी है।
5. बीसलपुर बाँध
बीसलपुर बांध राजस्थान के बड़े बांधों में से एक माना जाता है। बड़े बालों में से एक होने के कारण यह कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता करवाता है। बीसलपुर बांध आसपास के क्षेत्र के लिए पानी की उपलब्धता का एक अच्छा स्रोत है।
विशेषताएं
स्थान: टोंक
नदी: बनास नदी
निर्माण: 1990-1999
उपयोग:
• बीसलपुर बांध का मुख्य उपयोग सिंचाई है।
• बीसलपुर बांध अपने आसपास के क्षेत्र जैसे जयपुर अजमेर आदि कई अन्य क्षेत्रों को भी जल उपलब्ध करवाता है।
6. जाखम बांध
जाखम बांध राजस्थान के मुख्य परियोजनाओं के अंतर्गत आता है। आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए जाखम बांध का निर्माण किया गया था। इससे कई सुविधाओं में वृद्धि देखने को मिली है।
विशेषताएं
स्थान: प्रतापगढ़
नदी: जाखम नदी
निर्माण: 1970-1986
उपयोग:
• जाखम बांध का मुख्य उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जाता है।
• इसका एक मुख्य उपयोग सिंचाई भी है।
7. सोम-कमला-अंबा बाँध
सोम-कमला-अंबा-बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित है।यह बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित किसानों के लिए लाभकारी साबित हुआ है। यह दक्षिण राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण बांध माना जाता है।
विशेषताएं
स्थान: डूंगरपुर
नदी: सोम नदी
निर्माण: 1991-1999
उपयोग:
• इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण है।
• इसका अन्य मुख्य उद्देश्य सिंचाई भी है।
8. मेजा बांध
मेजा बांध राजस्थान के प्रमुख जलाशय में से एक माना जाता है। मेजा बांध का स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह बांध कृषियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हुआ है।
विशेषताएं
स्थान: भीलवाड़ा
नदी: मेजा नदी
निर्माण: 1957
उपयोग:
• मेजा बांध का प्रमुख उपयोग जलापूर्ति है।
• इसका अन्य महत्वपूर्ण प्रयोग सिंचाई भी है।
9. पंचना बांध
पंचना बांध पाॅच नदियों के संगम पर बना है इसलिए इसका नाम पंचना बांध पड़ा। पूर्वी राजस्थान के लिए यह एक महत्वपूर्ण बांध है। राजस्थान के प्रमुख बांधों में से एक बांध पांचना बांध माना जाता है।
विशेषताएं
स्थान: करौली
नदी: पांच नदियों का संगम
निर्माण: 1978-79
उपयोग:
• इस बांध का मुख्य उपयोग बाढ़ नियंत्रण करना है।
• इसका उपयोग जल संग्रहण के लिए भी किया जाता।
• सिंचाई में भी यह बांध उपयोगी है।
10. जवाई बांध
जवाई बांध पश्चिम राजस्थान का प्रमुख बांध है। यह बांध वन्य जीव संरक्षण और पर्यटन के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। जवाई बांध पश्चिम राजस्थान की एक पहचान है। जवाई बांध आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है।
विशेषताएं
स्थान: पाली
नदी: जवाई नदी
निर्माण: 1946-1957
उपयोग:
• इसका मुख्य उपयोग पेयजल के लिए किया जाता है।
• इसका अन्य मुख्य उपयोग सिंचाई भी है।