उत्तर प्रदेश भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। उत्तर प्रदेश अपने ऐतिहासिक सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहरों के लिए अटल प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश में कई प्रमुख पर्यटन स्थल भी स्थित है जिसे भारत का इतिहास धर्म व संस्कृति जुड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में, यहां के वन्य जीव अभ्यारण व उद्यान काफी प्रसिद्ध है। वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान व वन्य जीव अभ्यारण स्थापित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश में बढ़ते हुए शहरीकरण व पेड़ व जंगल काटने की वजह से कई जंगली जानवर लुप्त हो चुके हैं उन्हीं के संरक्षण के लिए यह प्रसिद्ध अभ्यारण बनाए गए हैं। इस लेख में हम उत्तर प्रदेश के कुछ राष्ट्रीय उद्यान और वन्य जीव अभ्यारण के बारे में पड़ेंगे जो की प्रतियोगी परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। व UP Constable आदि परीक्षा में पूछे जाते हैं। उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश में केवल एक ही प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। जो की काफी प्राचीन समय से निर्मित है।निम्नलिखित उत्तर प्रदेश का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है। संरक्षित क्षेत्र स्थान प्रमुख वन्यजीव दुधवा राष्ट्रीय उद्यान लखीमपुर खीरी बाघ, गैंडा, बारहसिंगा कतरनिया घाट वन्यजीव अभयारण्य बहराइच घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य चंबल नदी क्षेत्र घड़ियाल, डॉल्फिन हस्तिनापुर वन्यजीव अभयारण्य मेरठ क्षेत्र नीलगाय, सांभर रणीपुर वन्यजीव अभयारण्य चित्रकूट तेंदुआ, चीतल कैमूर वन्यजीव अभयारण्य सोनभद्र-मिर्जापुर भालू, चिंकारा 1. दुधवा राष्ट्रीय उद्यान उत्तर प्रदेश का एकमात्र और सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यान दुधवा राष्ट्रीय उद्यान है। इस उद्यान की स्थापना सन 1977 में की गई थी। यह लखीमपुरी के जिले नेपाल के पास में स्थित है। यह लगभग 490 किलोमीटर क्षेत्र की लंबाई में फैला हुआ है। यह उद्यान अपनी जैव विविधता के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है। यहां पर पाए जाने वाले प्रमुख वन्य जीव बंगाल टाइगर, एक सिंह वाला गंदा, एशियाई हाथी, बारासिंघा, हिरण, तेंदुआ, जंगली सूअर और मगरमच्छ आदि पाए जाते है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान बारहसिंगा संरक्षण के लिए काफी प्रसिद्ध है। वन्य जीव के अलावा यहां पर स्थानीय व प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। यह उद्यान प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अच्छा प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यह उद्यान नेपाल भारत की तराई सीमा क्षेत्र पर स्थित है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान में प्रोजेक्ट टाइगर भी चलाया जाता है। यहां पर केवल भारत के लोग ही नहीं व विदेश से आए लोग भी पर्यटन करना पसंद करते हैं। जीव प्रेमियों के लिए यह आकर्षण का केंद्र है। इसके आसपास घास के मैदान पाए जाते हैं। यहां दुर्लभ प्रजातियों के साथ- साथ संकटग्रस्त प्रजातियां भी जानवरों की पाई जाती है। दुधवा राष्ट्रीय उद्यान घूमना पर्यटकों के लिए काफी रोमांचित होता है। बिंदु जानकारी नाम दुधवा राष्ट्रीय उद्यान प्रकार राष्ट्रीय उद्यान स्थापना वर्ष 1977 स्थान लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश क्षेत्र तराई क्षेत्र प्रसिद्धि उत्तर प्रदेश का प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख वन्यजीव बाघ, एक सींग वाला गैंडा, बारहसिंगा, हाथी प्रमुख वनस्पति साल के घने वन एवं घासभूमि महत्व प्रोजेक्ट टाइगर एवं गैंडा संरक्षण के लिए प्रसिद्ध 1. कतरनिया वन्य जीव अभ्यारण कतरनिया वन्य जीव अभ्यारण उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित है। यह नेपाल की सीमा से जुड़ा हुआ है। यह वन्य जीव अभ्यारण जैव विविधता का मुख्य केंद्र माना जाता है। इसकी स्थापना लगभग 1975 में हुई थी। यह लगभग 550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां पर बाघ तेंदुआ हाथी चीतल एक सिंह वाला गेंडा फिशिंग कैट और ऊदबिलाव आदि जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण के पास ही गेरुआ नदी है जो की काफी प्रसिद्ध नदी है। इस नदी में घड़ियाल और मगरमच्छ पाए जाते हैं। यह अभ्यारण 2003 में टाइगर प्रोजेक्ट में भी शामिल था। यहां पर पर्यटक जंगल सफारी व वोटिंग करना ज्यादा पसंद करते हैं। यहां पर मुख्य वन्य जीव जिनकी प्रजातियां लुप्त होती जा रही हैं उनका संरक्षण किया जाता है। यहां पर पक्षियों में गिद्ध, नीलकंठ प्रमुख है। हाल ही में इसको टूरिज्म के लिए विकसित किया गया है। यह भारतीय वन्य जीव संस्थान सहित कई संस्थाओं का अनुसंधान का केंद्र रहा है। यहां पर वन्य जीवों की निगरानी की जाती है। वन्य जीवों की निगरानी के लिए निगरानी नेटवर्क भी जारी किया गया है। 2. राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण उत्तर भारत में चंबल नदी के किनारे पर स्थित है। यह वन्य जीव अभ्यारण उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश एवं राजस्थान की सीमाओं तक फैला हुआ है। की स्थापना लगभग 1979 में हुई थी। यहां पर मुख्य प्रजातियां डॉल्फिन, घड़ियाल आदि पाए जाते हैं। यह अभ्यारण वन्य जीव संरक्षण 1972 के अंतर्गत संरक्षित है। यह चंबल नदी के 425 किलोमीटर लंबी धारा के साथ जुड़ा हुआ है। चंबल नदी भारत की सबसे स्वच्छ नदियों में से एक मानी जाती है इसलिए इन जीवों के लिए राष्ट्रीय चंबल वन्य जीव अभ्यारण आदर्श है। इस अभ्यारण में न केवल जलचर को बल्कि कई वन्य जीवों को भी संरक्षण प्रदान है। यहां पर पक्षियों की भी 320 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यह वन्य जीव अभ्यारण बर्ड लाइफ इंटरनेशनल के महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। 3. हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर के आसपास फैला हुआ है। यह एक सबसे बड़ा वन्य जीव अभ्यारण है। इस अभ्यारण की स्थापना लगभग 1986 में हुई थी। यह लगभग 2073 किलोमीटर वर्ग के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह प्रमुख नदी गंगा पर स्थित है। यहां के प्रसिद्ध जीव हिरण, नीलगाय, तेंदुआ, जंगली सूअर, घड़ियाल आदि है। यहां पर कई प्रवासी पक्षी भी पाए जाते हैं। यह क्षेत्र ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि हस्तिनापुर को महाभारत काल से जोड़ा गया है। हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण को दलदली हिरण का संरक्षण क्षेत्र माना जाता है। यहां पर रेत के टिलो घास के मैदाने का मिश्रण पाया जाता है। इसमें लगभग 350 पक्षी भी पाए जाते हैं। यह पारिस्थितिकी संतुलन बनाने में अत्यंत महत्वपूर्णता रखता है। प्रवासी पक्षियों का यहां पर प्रवेश इसको अत्यंत लोकप्रियता प्रदान करता है। यहां सरकार द्वारा कई जीवन के संरक्षण के लिए भी योजनाएं चलाई गई हैं। जिनमें से एक योजना राष्ट्रीय हरित अधिकरण है जिसे 2024 में यहां पर चलाया