जब किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार काम करने में असमर्थ हो जाती है, तो केंद्र सरकार उस राज्य का शासन अपने हाथ में ले लेती है। इसी व्यवस्था को राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) कहा जाता है। यह भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण विषय है
संवैधानिक आधार – अनुच्छेद 356
राष्ट्रपति शासन का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 में दिया गया है। यह अनुच्छेद भाग XVIII (आपातकालीन उपबंध) के अंतर्गत आता है, जिसे “राज्य आपातकाल” या “संवैधानिक आपातकाल” भी कहा जाता है।
राष्ट्रपति शासन कब लगाया जाता है?
राष्ट्रपति शासन मुख्यतः निम्न परिस्थितियों में लगाया जाता है:
- किसी राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता (Constitutional Breakdown) हो जाए।
- विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिले और सरकार बनाना संभव न हो।
- गठबंधन सरकार का समर्थन वापस लेने से सरकार गिर जाए और कोई वैकल्पिक सरकार न बन पाए।
- राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ जाए और राज्य सरकार उसे नियंत्रित करने में असफल हो।
- राज्यपाल केंद्र को रिपोर्ट भेजे कि राज्य का प्रशासन संविधान के अनुरूप नहीं चल रहा है।
राष्ट्रपति शासन लगाने की प्रक्रिया
- राज्यपाल राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजता है (या राष्ट्रपति स्वयं संतुष्ट हो सकते हैं)।
- राष्ट्रपति इस रिपोर्ट के आधार पर उद्घोषणा (Proclamation) जारी करते हैं।
- यह उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) से 2 महीने के भीतर मंजूर होनी आवश्यक है।
- संसद की मंजूरी के बाद यह शुरुआत में 6 महीने के लिए प्रभावी रहता है।
- हर 6 महीने में संसद की मंजूरी से इसे आगे बढ़ाया जा सकता है, परंतु अधिकतम 3 वर्ष तक ही (44वें संविधान संशोधन, 1978 के बाद विशेष परिस्थितियों में)।
राष्ट्रपति शासन के प्रभाव
जब किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होता है, तो:
- राज्य मंत्रिपरिषद (मुख्यमंत्री व मंत्री) को बर्खास्त कर दिया जाता है।
- राज्य का प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम पर चलाया जाता है।
- विधानसभा को भंग या निलंबित किया जा सकता है।
- राज्य का प्रशासनिक नियंत्रण सीधे केंद्र सरकार के पास चला जाता है।
- संसद को राज्य के लिए कानून बनाने और बजट पास करने का अधिकार मिल जाता है।
एस. आर. बोम्मई केस (1994) – न्यायिक पुनरावलोकन
S.R. Bommai vs Union of India (1994) मामला राष्ट्रपति शासन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सुप्रीम कोर्ट फैसला है। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) के अधीन है।
- सरकार का बहुमत विधानसभा के पटल (Floor Test) पर ही साबित होना चाहिए, राजभवन में नहीं।
- अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग रोकने के लिए यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
इस फैसले के बाद से राष्ट्रपति शासन के दुरुपयोग में काफी कमी आई है।
भारत में राष्ट्रपति शासन के उल्लेखनीय उदाहरण
- पंजाब राज्य में राष्ट्रपति शासन सबसे अधिक बार लगाया गया है।
- केरल में सबसे पहली बार 1959 में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
- अब तक भारत में 100 से अधिक बार विभिन्न राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा चुका है।