Rajasthan GK

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राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान व अभ्यारण्य: परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण नोट्स

परिचय राजस्थान केवल मरुस्थलीय क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि अपने पर्यटन क्षेत्र के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। राजस्थान में वन्य जैव विविधता अधिक होने के कारण यहां के उद्यान काफी प्रसिद्ध है। पर्यटक भी इन उद्यानों को देखने व घूमना पसंद करते हैं। राजस्थान के यह उद्यान न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं बल्कि जैव प्रजातियों का संरक्षण भी करते हैं। राजस्थान में काफी सारे उद्यान है लेकिन परीक्षा की दृष्टि से हम कुछ महत्वपूर्ण उद्यानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जो की निम्नलिखित है: राजस्थान के प्रमुख उद्यान व अभ्यारण्य राजस्थान के प्रमुख उद्यान व अभ्यारण्य की सूची क्र.सं. उद्यान / अभ्यारण्य का नाम जिला / स्थान 1. रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान सवाई माधोपुर 2. केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर 3. मुकुंदरा Hils राष्ट्रीय उद्यान कोटा, चित्तौड़गढ़ 4. राष्ट्रीय मरु उद्यान जैसलमेर, बाड़मेर 5. सरिस्का वन्यजीव अभ्यारण्य अलवर 6. सीतामाता वन्यजीव अभ्यारण्य प्रतापगढ़ 7. तालछापर अभ्यारण्य चूरू 8. माउंट आबू अभ्यारण्य सिरोही 9. कुंभलगढ़ अभ्यारण्य राजसमंद, उदयपुर, पाली 10. राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण्य कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर 1. रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान केवल राजस्थान का ही नहीं बल्कि भारत का भी सबसे प्रसिद्ध उद्यान हैं। यह उद्यान अपने चीतों के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध हैं। विशेषताएं स्थान: सवाई माधोपुर स्थापना: 1980 में यहां पर पाए जाने वाले मुख्य वन्य जीव बाघ, तेंदुआ, भालू, चीता, हिरण, मगरमच्छ, लंगूर आदि हैं।  रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में सूखे‌ जंगल पाए जाते हैं। प्राचीन काल में जयपुर के महाराजाओं का शिकार का स्थान रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान हुआ करता था। 2. सरिस्का टाइगर रिज़र्व उद्यान सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान अरावली पर्वत श्रृंखला पर बना हुआ है। राजस्थान के प्रमुख उद्यानों में से एक सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान है। विशेषताएं स्थान: अलवर स्थापना: 1955 में सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में पाए जाने वाले प्रमुख वन्य जीव लंगूर, तेंदुआ, सांभर, चीता, बाघ, लकड़बग्घा, जंगली सूअर आदि है। यहां पर सूखे पेड़ पाती वन पाए जाते हैं वह अनेक प्रकार के पेड़ भी यहां पर पाए जाते हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में बेर के पेड़ भी पाए जाते हैं। 3. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर में स्थित हैं।केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को बर्ड सैंक्चुरी भरतपुर के नाम से भी जाना जाता है।यहां पर कई सारे पक्षी आवागमन करते हैं। यह मुख्यतः प्रवासी पक्षियों के आवागमन के लिए प्रसिद्ध है। विशेषताएं स्थान: भरतपुर स्थापना: 1982 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मुख्यतः हमिंगबर्ड, क्रेन, ईगल, सारस, बत्तख, साइबेरियन क्रेन आदि पक्षी पाए जाते हैं। यहां अन्य जल जीव जैसे कछुआ, मेंढक, सांप, मछली आदि भी पाए जाते हैं। यहां पर घास के मैदान झाड़ियां और पेड़ भी पाए जाते हैं। भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को घना पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है। 4. डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में फैला हुआ है। यह उद्यान अपने रेट के टिलों की वजह से काफी प्रसिद्ध माना जाता है। डेजर्ट का मतलब रेट होता है एवं इस उद्यान में भी रेत के‌ टिले पाए जाते हैं। स्थान: बाड़मेर और जैसलमेर स्थापना: 1980 डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक माना जाता है। यहां पर चिंकारा, डेजर्ट फॉक्स, ईगल, डेजर्ट कैट, मॉनिटर लिजर्ड आदि  रेगिस्तानी पक्षी व जानवर पाए जाते हैं। यहां पर चट्टानी क्षेत्र भी देखने को मिलता हैं।  यहां पर अत्यधिक रेट होने के कारण यहां पर कैक्टस के पौधे भी पाए जाते हैं। 5. माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण सिरोही जिले में स्थित है। माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है। यहां पर सदाबहार वन पाए जाते हैं जिनकी वजह से यह काफी प्रसिद्ध वन्य जीव अभ्यारण है। विशेषताएं स्थान: माउंट आबू सिरोही स्थापना: 1960 माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सांभर, स्लॉथ भालू, भेड़िया, जंगली सूअर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। यह वन्य जीव अभ्यारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता जैसे सुंदर घाटियाँ‌ झरने व नदी के लिए प्रसिद्ध है। यह अभ्यारण भारत के ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। 6. कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण उदयपुर में स्थित है। यह अभ्यारण कुंभलगढ़ किले के आसपास फैला हुआ है। यह अभ्यारण घने जंगल और पहाड़ी इलाकों में बना हुआ है। यह अपने प्राकृतिक स्वरूप के लिए काफी प्रसिद्ध है। स्थान: राजसमंद, उदयपुर, पाली स्थापना: 1971 कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में भालू, तेंदुआ, जंगली सूअर, नीलगाय आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण में ईगल, उल्लू, मोर आदि कई स्थानीय जीव पाए जाते हैं। यह अपने सूखे पत्तों वाले वन के लिए प्रसिद्ध है। कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में बड़ा आकर्षक दृश्य देखने को मिलता है। 7. ताल छापर अभ्यारण ताल छापर अभ्यारण चुरू जिले में स्थित है। ताल छापर अभ्यारण चाहे एक छोटा अभ्यारण है परंतु यह भी राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यारण है। ताल छापर अभ्यारण पक्षियों की प्रजाति के लिए काफी प्रसिद्ध है। स्थान: चुरु स्थापना: 1966 ताल छापर अभ्यारण में क्रेन व ईगल मुख्यतः पाए जाने वाले पक्षी हैं। यह अभ्यारण क्षेत्र चारों तरफ से घास से घिरा हुआ है। इस अभ्यारण में 300 से भी अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है। यहां के खुले मैदाने में काले हिरण देखने को मिल जाते हैं। 8. सीता माता वन्य जीव अभ्यारण सीता माता वन्य जीव अभ्यारण प्रतापगढ़ में स्थित है। यह अभ्यारण उड़ने वाली गिलहरियों के लिए प्रसिद्ध है। इस अभ्यारण के चारों ओर घने जंगल पाए जाते हैं। स्थान: प्रतापगढ़ स्थापना: 1979 इस अभ्यारण में उड़ने वाली गिलहरियां पाई जाती है। सीता माता वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सियार, चीता, जंगली बिल्ली, हिरण आदि जानवर पाए जाते हैं।धर्म की दृष्टि से यह अभ्यारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राजस्थान के सबसे बड़े अभ्यारण में से एक है। 9. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण यह अभ्यारण राजस्थान की सबसे प्रमुख नदी चंबल नदी के क्षेत्र में स्थित है। इस अभ्यारण को बनाने का मुख्य उद्देश्य जल जीव का संरक्षण करना है। यह अभ्यारण काफी लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है। स्थान: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य

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राजस्थान के 10 सबसे बड़े बाँध|(Biggest dams of Rajasthan)

परिचय राजस्थान भले ही एक मरुस्थलीय राज्य माना जाता है लेकिन सिंचाई के लिए जल संरक्षण के लिए यहां पर कई प्रकार के बांध बनाए गए हैं। यह बांध राजस्थान में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Dams of Rajasthan ( राजस्थान के प्रमुख बांध ) राजस्थान में छोटे और बड़े सभी बांधों को मिलाया जाए तो  काफी सारे बांधों का निर्माण यहां पर किया गया है परंतु एग्जाम के द्रष्टि से हमें राजस्थान के प्रमुख बांधो के बारे में जानकारी करनी है जो कि कुछ निम्न इस प्रकार से है: 1. राणा प्रताप सागर बांध राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक राणा प्रताप सागर बांध को माना जाता है। राणा प्रताप सागर बांध की जल संरक्षण क्षमता अधिक होने के कारण इसको राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से एक माना जाता है। विशेषताएं स्थान: चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में नदी: चंबल नदी निर्माण: 1960-1970 उपयोग: • बिजली उत्पादन • सिंचाई • जल संरक्षण 2. जवाहर सागर बांध राजस्थान के कोटा जिले में बना हुआ ये बांध, राजस्थान का प्रमुख बांध है ये भी चम्बल नदी पर बना हुआ है और बिजली की उत्पादन में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है। 1960–1970 के दशक में इसका निर्माण किया गया है। विशेषताएं स्थान: कोटा नदी: चंबल नदी निर्माण कार्य: 1960 से 1970 मुख्य उपयोग: • जल विद्युत निर्माण करने के लिए। 3. कोटा बैराज कोटा बैराज सिंचाई के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बंद माना जाता है जो की राजस्थान के कोटा जिले में स्थित है। राजस्थान के सबसे बड़े बांधों में से कोटा बैराज एक बाँध होने के कारण यहां से लाखों हेक्टर पानी प्राप्त होता है। विशेषताएं स्थान: कोटा नदी: चंबल नदी निर्माण कार्य: 1954-1960 उपयोग: • खेतों की सिंचाई के लिए जल उपलब्ध करवाना। • फसलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए। 4. माही बजाज सागर बांध माही बजाज सागर बांध दक्षिण राजस्थान का प्रमुख बांध माना जाता है। खेती में उपयोगी यह बंद कृषकों के लिए वरदान साबित होता है। मत्स्य पालन वालों के लिए माही बजाज सागर बांध एक अच्छा स्रोत है। विशेषताएं स्थान: बांसवाड़ा नदी: माही नदी निर्माण: 1972-1983 उपयोग: • माही बाजार सागर बांध का प्रमुख उपयोग सिंचाई है। • मत्स्य पालन वालों के लिए माही बाजार सागर बांध एक सहायक स्रोत है। • इस बांध का मुख्य प्रयोग जल विद्युत उत्पादन भी है। 5. बीसलपुर बाँध बीसलपुर बांध राजस्थान के बड़े बांधों में से एक माना जाता है। बड़े बालों में से एक होने के कारण यह कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता करवाता है। बीसलपुर बांध आसपास के क्षेत्र के लिए पानी की उपलब्धता का एक अच्छा स्रोत है। विशेषताएं स्थान: टोंक नदी: बनास नदी निर्माण: 1990-1999 उपयोग: • बीसलपुर बांध का मुख्य उपयोग सिंचाई है। • बीसलपुर बांध अपने आसपास के क्षेत्र जैसे जयपुर अजमेर आदि कई अन्य क्षेत्रों को भी जल उपलब्ध करवाता है। 6. जाखम बांध जाखम बांध राजस्थान के मुख्य परियोजनाओं के अंतर्गत आता है। आदिवासी क्षेत्र के विकास के लिए जाखम बांध का निर्माण किया गया था। इससे कई सुविधाओं में वृद्धि देखने को मिली है। विशेषताएं स्थान: प्रतापगढ़ नदी: जाखम नदी निर्माण: 1970-1986 उपयोग: • जाखम बांध का मुख्य उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जाता है। • इसका एक मुख्य उपयोग सिंचाई भी है। 7. सोम-कमला-अंबा बाँध सोम-कमला-अंबा-बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित है।यह बांध दक्षिण राजस्थान में स्थित किसानों के लिए लाभकारी साबित हुआ है। यह दक्षिण राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण बांध माना जाता है। विशेषताएं स्थान: डूंगरपुर नदी: सोम नदी निर्माण: 1991-1999 उपयोग: • इसका मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण है। • इसका अन्य मुख्य उद्देश्य सिंचाई भी है। 8. मेजा बांध मेजा बांध राजस्थान के प्रमुख जलाशय में से एक माना जाता है। मेजा बांध का स्थानीय कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह बांध कृषियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत साबित हुआ है। विशेषताएं स्थान: भीलवाड़ा नदी: मेजा नदी निर्माण: 1957 उपयोग: • मेजा बांध का प्रमुख उपयोग जलापूर्ति है। • इसका अन्य महत्वपूर्ण प्रयोग सिंचाई भी है। 9. पंचना ‌बांध पंचना बांध‌ पाॅच नदियों के संगम पर बना है इसलिए इसका नाम पंचना बांध पड़ा। पूर्वी राजस्थान के लिए यह एक महत्वपूर्ण बांध है। राजस्थान के प्रमुख बांधों में से एक बांध पांचना बांध माना जाता है। विशेषताएं स्थान: करौली नदी: पांच नदियों का संगम निर्माण: 1978-79 उपयोग: • इस बांध का मुख्य उपयोग बाढ़ नियंत्रण करना है। • इसका उपयोग जल संग्रहण के लिए भी किया जाता। • सिंचाई में भी यह बांध‌ उपयोगी है। 10. जवाई बांध जवाई बांध पश्चिम राजस्थान का प्रमुख बांध है। यह बांध वन्य जीव संरक्षण और पर्यटन के लिए भी काफी प्रसिद्ध है।  जवाई बांध पश्चिम राजस्थान की एक पहचान है। जवाई बांध आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ है। विशेषताएं स्थान: पाली नदी: जवाई नदी निर्माण: 1946-1957 उपयोग: • इसका मुख्य उपयोग पेयजल के लिए किया जाता है। • इसका अन्य मुख्य उपयोग सिंचाई भी है। राजस्थान के प्रमुख बाँध: (FAQ) राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? भराव क्षमता (Water Storage) के आधार पर राणा प्रताप सागर बाँध (चित्तौड़गढ़) सबसे बड़ा बाँध है। राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? भराव क्षमता में दूसरा स्थान माही बजाज सागर बाँध (बाँसवाड़ा) का है। यह राजस्थान का सबसे लंबा बाँध भी है। पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध कौन सा है? पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध जवाई बाँध (पाली) है। इसे ‘मारवाड़ का अमृत सरोवर’ भी कहते हैं। राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध कौन सा है? प्रतापगढ़ जिले में स्थित जाखम बाँध राजस्थान का सबसे ऊँचा बाँध है (ऊँचाई: 81 मीटर)। राजस्थान का सबसे बड़ा मिट्टी का बाँध कौन सा है? करौली जिले में स्थित पाँचना बाँध मिट्टी से बना राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है। यह अमेरिका के सहयोग से बना था। राजस्थान का सबसे छोटा बाँध कौन सा है? क्षेत्रफल और भराव के हिसाब से धौलपुर का लोटी बाँध सबसे छोटा माना जाता है। बनास नदी पर बना सबसे प्रमुख बाँध कौन सा है? टोंक जिले में स्थित बीसलपुर बाँध बनास नदी पर बना है, जो राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। कोटा बैराज का मुख्य उपयोग क्या है? चंबल नदी पर बने इस बाँध का उपयोग

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