भारत का सबसे बड़ा बांध- टिहरी बांध|(Biggest dam of india)

परिचय

बांध नदियों या नालों पर बनाए गए एक अवरोधक ढांचा होते हैं, जो पानी के प्रवाह को रोककर उसे नियंत्रित करने, और जल स्तर बढाने के लिए बनाए जाते हैं। यह जल संसाधन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इनका उपयोग कई उद्देश्यों से किया जाता है।

टिहरी बांध का‌ परिचय

भारत में कई प्रकार के बांध पाए जाते हैं, लेकिन भारत का सबसे बड़ा बांध टिहरी बांध को माना जाता है। टिहरी बांध उत्तराखंड के टिहरी जिले में भागीरथी नदी पर बना हुआ है।टिहरी बांध को बनाने का मुख्य उद्देश्य है जल संरक्षण बिजली उत्पादन इत्यादि है।

मुख्य विशेषताएं:

ऊंचाई: लगभग 260.5 मीटर

लंबाई: 575 मीटर

स्थान: उत्तराखंड

प्रकार: मिट्टी और चट्टान से बना

नदी: भागीरथी नदी

नोट: टिहरी बांध की ऊंचाई लगभग 260.50 मीटर होने के कारण यह भारत का सबसे बड़ा बांध माना जाता है और सबसे ऊंचा बांध माना जाता है।

उपयोग

• बिजली उत्पादन के लिए

भारत का सबसे बड़ा बांध होने के कारण टिहरी बांध से जल विद्युत उत्पन्न की जाती है, जो कि कई राज्यों को बिजली प्रदान करती है। बिजली उत्पादन के लिए टिहरी बांध एक अच्छा स्रोत है। टिहरी बांध के कारण कई राज्यों को बिजली प्राप्त होती है। टिहरी बांध से लगभग 1000 मेगावाट जल विद्युत उत्पन्न की जाती है।

• जल संरक्षण क्षमता को बढ़ाने के लिए

टिहरी बांध जल भंडारण क्षमता को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। टिहरी बांध में संरक्षित किये जल को सूखे के समय में उपयोग में लाया जाता है। इससे पूरे साल जल की उपलब्धता बनी रहती है। टिहरी बांध सबसे बड़ा बांध होने के कारण इसमें काफी सारा जल इकट्ठा किया जाता है।

• सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना

टिहरी बांध का अन्य उपयोग सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना भी है जो की कृषियों के लिए काफी लाभदायक साबित होता है। टिहरी बांध के कारण सूखे क्षेत्रों में भी खेती करने में आसानी होती है व‌ सूखे क्षेत्रों में भी खेती करने के लिए पानी की उपलब्धता हो जाती है।‌ टिहरी बांध लाखों हेक्टर पानी कृषियों को उपलब्ध कराता है। आज फसलों की उत्पादकता टिहरी बांध के कारण ही बढ़ रही है।

• बाढ़ नियंत्रण में उपयोगी

बांधों का मुख्य उपयोग बारिश के अतिरिक्त पानी को रोकना है इसी प्रकार टिहरी बांध का मुख्य उपयोग बाढ़ को रोकना है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा होती है। बांधों को बनाना जान माल के नुकसान को कम करता है। टिहरी बांध भारत का सबसे बड़ा बंद होने के कारण इसमें अधिक से अधिक बारिश के अतिरिक्त पानी को रोका जा सकता है जिससे किसी भी व्यक्ति को बारिश के अतिरिक्त पानी से किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो।

• पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से

टिहरी बांध का उपयोग पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से भी किया जाता है। टिहरी बांध गांव और कस्बे के जल संकट को कम करता है। टिहरी बांध से कई ‌बड़े शहरों को रोजाना करोड़ों लीटर पानी भी उपलब्ध कराया जाता है। टिहरी बांध से स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होता है।

नोट: टिहरी बांध से बड़ी मात्रा में जल विद्युत उत्पन्न की जाती है( लगभग 1000 मेगावाट)

टिहरी बांध का निर्माण

• टिहरी बांध का निर्माण 1976 में शुरू हुआ व 2006 तक पूरा हुआ।

टिहरी बांध का इतिहास

• यह परियोजना भारत की सबसे महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में से एक रही थी।

• टिहरी बांध के निर्माण के दौरान कई प्रकार तकनीकी और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

टिहरी बांध के नुकसान

• विस्थापन

टिहरी बांध भारत का सबसे बड़ा बांध है जब इस  बांध का निर्माण हो रहा था तब हजारों की संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े थे। टिहरी बांध के कारण कई गांव जलमग्न भी हो गए थे। व लोगों को पुनर्वास करने में कई सारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

• प्रकृति पर प्रभाव

टिहरी बांध बनने के कारण कई वन्यजीवों के आवास प्रभावित हुए। टिहरी बांध के कारण जंगल और वनस्पति नष्ट हो गए एवं भारत की जैव विविधता में भी कमी देखने को मिली।

• भूकंप का खतरा अधिक होना

टिहरी बांध के निर्माण के बाद उत्तराखंड में भूकंप आने का खतरा बढ़ने लगा। सबसे बड़ा बांध होने के कारण व सबसे बड़ा जलाशय होने के कारण प्राकृतिक घटनाएं जैसे भूकंप की चिंता रहती हैं।

• नदी के प्रवाह में बदलाव

टिहरी बांध उत्तराखंड में स्थित है एवं भागीरथी नदी पर टिहरी बांध के निर्माण के बाद भागीरथी नदी के प्रवाह में बदलाव देखने को मिला। इसके कारण भागीरथी नदी का बहाव प्रभावित हुआ। टिहरी बांध के निर्माण के बाद जल की गुणवत्ता कम होती चली गई।

• संभावित खतरा

यदि किसी भी क्षेत्र में किसी भी कारण से बंद को कोई भी नुकसान पहुंचता है तो कई क्षेत्रों में तबाही हो सकती है वह नीचे के क्षेत्र नष्ट भी हो सकते हैं।

निष्कर्ष

टिहरी बांध विकास का ही एक उदाहरण है‌। यदि इनका संतुलन बनाकर रखा जाए तो यह सामाजिक एवं पर्यावरणीय प्रभावों को‌‌ सही रख सकता है। टिहरी बांध केवल जल संरक्षण के क्षेत्र में ही नहीं बल्कि खेती, रोजगार, पर्यटन आदि क्षेत्रों में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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