परिचय
राजस्थान केवल मरुस्थलीय क्षेत्र के लिए प्रसिद्ध ही नहीं बल्कि अपने पर्यटन क्षेत्र के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। राजस्थान में वन्य जैव विविधता अधिक होने के कारण यहां के उद्यान काफी प्रसिद्ध है। पर्यटक भी इन उद्यानों को देखने व घूमना पसंद करते हैं। राजस्थान के यह उद्यान न केवल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं बल्कि जैव प्रजातियों का संरक्षण भी करते हैं।
राजस्थान में काफी सारे उद्यान है लेकिन परीक्षा की दृष्टि से हम कुछ महत्वपूर्ण उद्यानों के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे जो की निम्नलिखित है:
1. रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान
रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान केवल राजस्थान का ही नहीं बल्कि भारत का भी सबसे प्रसिद्ध उद्यान हैं। यह उद्यान अपने चीतों के लिए अत्यधिक प्रसिद्ध हैं।
विशेषताएं
स्थान: सवाई माधोपुर
स्थापना: 1980 में
यहां पर पाए जाने वाले मुख्य वन्य जीव बाघ, तेंदुआ, भालू, चीता, हिरण, मगरमच्छ, लंगूर आदि हैं। रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान में सूखे जंगल पाए जाते हैं। प्राचीन काल में जयपुर के महाराजाओं का शिकार का स्थान रणथंबोर राष्ट्रीय उद्यान हुआ करता था।
2. सरिस्का टाइगर रिज़र्व उद्यान
सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह उद्यान अरावली पर्वत श्रृंखला पर बना हुआ है। राजस्थान के प्रमुख उद्यानों में से एक सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान है।
विशेषताएं
स्थान: अलवर
स्थापना: 1955 में
सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में पाए जाने वाले प्रमुख वन्य जीव लंगूर, तेंदुआ, सांभर, चीता, बाघ, लकड़बग्घा, जंगली सूअर आदि है। यहां पर सूखे पेड़ पाती वन पाए जाते हैं वह अनेक प्रकार के पेड़ भी यहां पर पाए जाते हैं। सरिस्का टाइगर रिजर्व उद्यान में बेर के पेड़ भी पाए जाते हैं।
3. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर में स्थित हैं।केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को बर्ड सैंक्चुरी भरतपुर के नाम से भी जाना जाता है।यहां पर कई सारे पक्षी आवागमन करते हैं। यह मुख्यतः प्रवासी पक्षियों के आवागमन के लिए प्रसिद्ध है।
विशेषताएं
स्थान: भरतपुर
स्थापना: 1982
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में मुख्यतः हमिंगबर्ड, क्रेन, ईगल, सारस, बत्तख, साइबेरियन क्रेन आदि पक्षी पाए जाते हैं। यहां अन्य जल जीव जैसे कछुआ, मेंढक, सांप, मछली आदि भी पाए जाते हैं। यहां पर घास के मैदान झाड़ियां और पेड़ भी पाए जाते हैं। भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को घना पक्षी विहार के नाम से भी जाना जाता है।
4. डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान
डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान बाड़मेर और जैसलमेर जैसे जिलों में फैला हुआ है। यह उद्यान अपने रेट के टिलों की वजह से काफी प्रसिद्ध माना जाता है। डेजर्ट का मतलब रेट होता है एवं इस उद्यान में भी रेत के टिले पाए जाते हैं।
स्थान: बाड़मेर और जैसलमेर
स्थापना: 1980
डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान भारत के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यानों में से एक माना जाता है। यहां पर चिंकारा, डेजर्ट फॉक्स, ईगल, डेजर्ट कैट, मॉनिटर लिजर्ड आदि रेगिस्तानी पक्षी व जानवर पाए जाते हैं। यहां पर चट्टानी क्षेत्र भी देखने को मिलता हैं। यहां पर अत्यधिक रेट होने के कारण यहां पर कैक्टस के पौधे भी पाए जाते हैं।
5. माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण
माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण सिरोही जिले में स्थित है। माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है। यहां पर सदाबहार वन पाए जाते हैं जिनकी वजह से यह काफी प्रसिद्ध वन्य जीव अभ्यारण है।
विशेषताएं
स्थान: माउंट आबू सिरोही
स्थापना: 1960
माउंट आबू वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सांभर, स्लॉथ भालू, भेड़िया, जंगली सूअर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। यह वन्य जीव अभ्यारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता जैसे सुंदर घाटियाँ झरने व नदी के लिए प्रसिद्ध है। यह अभ्यारण भारत के ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है।
6. कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण
कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण उदयपुर में स्थित है। यह अभ्यारण कुंभलगढ़ किले के आसपास फैला हुआ है। यह अभ्यारण घने जंगल और पहाड़ी इलाकों में बना हुआ है। यह अपने प्राकृतिक स्वरूप के लिए काफी प्रसिद्ध है।
स्थान: राजसमंद, उदयपुर, पाली
स्थापना: 1971
कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में भालू, तेंदुआ, जंगली सूअर, नीलगाय आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। इस अभ्यारण में ईगल, उल्लू, मोर आदि कई स्थानीय जीव पाए जाते हैं। यह अपने सूखे पत्तों वाले वन के लिए प्रसिद्ध है। कुंभलगढ़ वन्य जीव अभ्यारण में बड़ा आकर्षक दृश्य देखने को मिलता है।
7. ताल छापर अभ्यारण
ताल छापर अभ्यारण चुरू जिले में स्थित है। ताल छापर अभ्यारण चाहे एक छोटा अभ्यारण है परंतु यह भी राजस्थान का सबसे महत्वपूर्ण अभ्यारण है। ताल छापर अभ्यारण पक्षियों की प्रजाति के लिए काफी प्रसिद्ध है।
स्थान: चुरु
स्थापना: 1966
ताल छापर अभ्यारण में क्रेन व ईगल मुख्यतः पाए जाने वाले पक्षी हैं। यह अभ्यारण क्षेत्र चारों तरफ से घास से घिरा हुआ है। इस अभ्यारण में 300 से भी अधिक पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती है। यहां के खुले मैदाने में काले हिरण देखने को मिल जाते हैं।
8. सीता माता वन्य जीव अभ्यारण
सीता माता वन्य जीव अभ्यारण प्रतापगढ़ में स्थित है। यह अभ्यारण उड़ने वाली गिलहरियों के लिए प्रसिद्ध है। इस अभ्यारण के चारों ओर घने जंगल पाए जाते हैं।
स्थान: प्रतापगढ़
स्थापना: 1979
इस अभ्यारण में उड़ने वाली गिलहरियां पाई जाती है। सीता माता वन्य जीव अभ्यारण में तेंदुआ, सियार, चीता, जंगली बिल्ली, हिरण आदि जानवर पाए जाते हैं।धर्म की दृष्टि से यह अभ्यारण अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह राजस्थान के सबसे बड़े अभ्यारण में से एक है।
9. राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण
यह अभ्यारण राजस्थान की सबसे प्रमुख नदी चंबल नदी के क्षेत्र में स्थित है। इस अभ्यारण को बनाने का मुख्य उद्देश्य जल जीव का संरक्षण करना है। यह अभ्यारण काफी लंबे क्षेत्र में फैला हुआ है।
स्थान: राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश
स्थापना: 1979
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण में घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन, कछुआ, मगरमच्छ आदि जलीय जीव पाए जाते हैं। अभ्यारण में सारे जैसे विभिन्न प्रवासी पक्षी पाए जाते हैं। भारत के सबसे प्रमुख रिवर सेंचुरी के नाम से भी जाना जाता है।
10. दर्रा वन्यजीव अभ्यारण
यह अभ्यारण कोटा जिले में स्थित हैं। यह अभ्यारण अरावली पर्वत श्रेणियां के बीच फैला हुआ है। यह अभ्यारण एक पहाड़ी क्षेत्र में जाकर बना हुआ है।
स्थान: कोटा
स्थापना: 1955
यहां पर तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, जंगली सूअर आदि वन्य जीव पाए जाते हैं। यहां आस-पास घने जंगल और पहाड़ियों पाए जाते हैं। यहां पर काफी शांत वातावरण रहता हैं। यह ज्यादा भीड़ भाड़ वाला क्षेत्र नहीं हैं।
निष्कर्ष
राजस्थान में उद्यान व अभ्यारण बनवाने का उद्देश्य केवल पर्यटन ही नहीं था बल्कि वन्य जीवों को सुरक्षा एवं संरक्षण प्रदान करना था।चंबल नदी पर स्थित अभ्यारण जल जीवो की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए बनाया गया है। अत: राजस्थान केवल रेतीला मरुस्थलीय क्षेत्र ही नहीं बल्कि संरक्षण एवं जैव विविधता के आधार पर सबसे आगे है।